सुनो भारत देश की नयी निराली ये दास्ताँ हैं
अपनी शीला नाजुक है नादान हैं
क्योंकि, वो अभी अभी हुई जवान है
मुन्नी की तो बात न पूछो
वो गली गली बदनाम है |
कल तक जो रज़िया राज करती थी
वो अब गुंडों से परेशान हैं
धन्नो बेचारी, उसके होने वाले हालको
सोच कर परेशान है |
वक़्त की नयी बयार है
ये नयी दौर का नया इम्तेहान है
कल तक जिनसे घर की शोभा थी
वो अब बस आइटम हैं, सामान हैं |
अपनी शीला नाजुक है नादान हैं
क्योंकि, वो अभी अभी हुई जवान है
मुन्नी की तो बात न पूछो
वो गली गली बदनाम है |
कल तक जो रज़िया राज करती थी
वो अब गुंडों से परेशान हैं
धन्नो बेचारी, उसके होने वाले हालको
सोच कर परेशान है |
वक़्त की नयी बयार है
ये नयी दौर का नया इम्तेहान है
कल तक जिनसे घर की शोभा थी
वो अब बस आइटम हैं, सामान हैं |
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